घंटों की मशक्कत के बाद आग पर पाया गया काबू
पूर्वोत्तर के दुर्गम इलाकों में भड़की भीषण जंगल की आग पर काबू पाने के लिए भारतीय वायुसेना बड़े स्तर पर अभियान चला रही है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों और कठिन उड़ान परिस्थितियों के बीच दो अलग-अलग मोर्चों पर भारी-भरकम हेलीकॉप्टरों को तैनात किया गया है।
1.39 लाख लीटर पानी से बुझाई गई आग
अरुणाचल प्रदेश के वालांग क्षेत्र में वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने प्रभावित इलाके में 1,39,800 लीटर पानी गिराकर बड़ी आग को सफलतापूर्वक बुझा दिया है। वहीं नागालैंड की द्जूकू वैली में अभियान अभी भी जारी है, जहां Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर दीमापुर के पास पदुमपोखरी झील से पानी भरकर जापफू पीक के नजदीक लगी आग पर काबू पाने में जुटे हैं। अधिकारियों के अनुसार, खड़ी ढलानों, कम दृश्यता और ऊंचाई पर विरल हवा जैसी परिस्थितियां इन हवाई अभियानों को बेहद चुनौतीपूर्ण बना रही हैं।
भारतीय वायुसेना एआई-आधारित मॉडलों की ओर बढ़ रही
इसी बीच, एयर वाइस मार्शल अजय कुन्नाथ ने कहा कि वायु अभियानों में तकनीक के इस्तेमाल के तरीके में बदलाव की जरूरत है, खासकर ऐसे क्षेत्रों में जहां जीरो-एरर वातावरण में काम करना होता है। एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान बातचीत में उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना अब स्थिर (फिक्स्ड) सिस्टम्स से हटकर एआई-आधारित मॉडलों की ओर बढ़ रही है।उन्होंने कहा कि फिलहाल वायुसेना एक निर्धारक (डिटरमिनिस्टिक) ढांचे में काम कर रही है, लेकिन अब उसे संभाव्य (प्रोबैबिलिस्टिक) मॉडल की ओर बढ़ना होगा। उनके मुताबिक, हवाई अभियानों में भरोसा और फेलसेफ सिस्टम बेहद जरूरी हैं क्योंकि यह ऐसा क्षेत्र है जहां गलती की गुंजाइश लगभग शून्य होती है।अजय कुन्नाथ ने कहा कि लक्ष्य ऑटोमेशन से ऑटोनॉमी की ओर बढ़ना है, जहां मानव की भूमिका धीरे-धीरे बदलती है, पहले ह्यूमन इन द लूप (निर्णयकर्ता), फिर “ह्यूमन ऑन द लूप” (निगरानी करने वाला) और अंततः ह्यूमन आउट ऑफ द लूप यानी पूर्ण स्वायत्त प्रणाली। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि एआई समाधानों को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में सीधे लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि हर डोमेन की अपनी जटिलताएं होती हैं।एयर वाइस मार्शल ने एआई की सटीकता को लेकर भी अहम चुनौती की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि प्रोबैबिलिस्टिक मॉडल 95 प्रतिशत तक सटीकता दे सकते हैं, लेकिन आखिरी पांच प्रतिशत की कमी ही सबसे बड़ा जोखिम पैदा करती है। इस अंतर को कम करने के लिए बेहतर मॉडल और उच्च गुणवत्ता वाले डेटा की आवश्यकता होगी।

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