पीवी नरसिम्हा राव की विरासत पर राजनीति, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने
नई दिल्ली: देश की राजधानी में महात्मा गांधी के स्मारक राजघाट के समीप नई समाधियों के निर्माण को लेकर एक बड़ा ऐतिहासिक फैसला लिया गया था। साल 1999 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा के अंतिम संस्कार स्थल को 'कर्मभूमि' के रूप में विकसित करने के बाद, इस पूरे क्षेत्र में नई समाधियों के निर्माण पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई थी। उस दौरान आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया गया था कि अतिविशिष्ट हस्तियों (वीवीआईपी) की समाधियों के निर्माण के लिए एक तय प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है और उस व्यवस्था के तहत अब राजघाट परिसर में अतिरिक्त समाधि बनाने के लिए बिल्कुल भी भूमि शेष नहीं रह गई है।
पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहा राव की समाधि पर रोक
इस कड़े नीतिगत फैसले का असर वर्ष 2004 में देश के पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पीवी नरसिंहा राव के निधन के समय देखने को मिला। उनके निधन के बाद उनके परिवार के सदस्यों और राजनीतिक समर्थकों द्वारा राजघाट पर उनकी समाधि बनाने की पुरजोर वकालत की गई थी। हालांकि, राजघाट पर नई समाधियों के निर्माण पर लगी रोक और जगह की कमी के चलते उनके पार्थिव शरीर के लिए वहां समाधि स्थल नहीं बनाया जा सका।

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