1992 बैच के IPS अधिकारी को मिली बड़ी जिम्मेदारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य पुलिस महकमे के शीर्ष पद को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है। प्रभारी पुलिस महानिदेशक (DGP) अरुण देव गौतम को अब पूर्णकालिक तौर पर प्रदेश का नया पुलिस बल प्रमुख नियुक्त कर दिया गया है। राज्य के गृह विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर उनके सेवाकाल को विस्तार देने की मुहर लगा दी गई है। बता दें कि अरुण देव गौतम वर्ष 1992 बैच के बेहद सीनियर आईपीएस (IPS) अधिकारी हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आगमन से ठीक पहले हुआ फैसला
शासन का यह बड़ा कदम ऐसे वक्त में सामने आया है, जब देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण दौरा प्रस्तावित है। सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तालमेल के लिहाज से इस स्थायी नियुक्ति को बेहद संवेदनशील और अहम माना जा रहा है। आईपीएस अरुण देव गौतम अब तक कार्यवाहक डीजीपी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे, जिन्हें अब स्थाई तौर पर महकमे की कमान सौंप दी गई है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों का लंबा प्रशासनिक अनुभव
नवनियुक्त डीजीपी अरुण देव गौतम के पास कानून व्यवस्था और प्रशासनिक प्रबंधन का एक लंबा और शानदार ट्रैक रिकॉर्ड है। 1992 में भारतीय पुलिस सेवा में चयन के बाद उन्हें शुरुआत में मध्य प्रदेश कैडर मिला था। हालांकि, साल 2000 में जब छत्तीसगढ़ एक नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया, तब उन्होंने नवगठित छत्तीसगढ़ कैडर को चुना। अविभाजित मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई संवेदनशील जिलों में वे बतौर पुलिस अधीक्षक (SP) तैनात रहकर अपनी प्रशासनिक कार्यकुशलता साबित कर चुके हैं।
झीरम घाटी कांड के बाद संभाली थी बस्तर की कमान
अरुण देव गौतम के करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण दौर तब रहा, जब साल 2013 में हुए खौफनाक झीरम घाटी नक्सली हमले के बाद उन्हें बस्तर रेंज का आईजी (IG) नियुक्त किया गया था। उस बेहद तनावपूर्ण और विपरीत माहौल में उन्होंने न केवल पुलिस बल का मनोबल बढ़ाया, बल्कि उसी साल हुए विधानसभा चुनावों को नक्सल प्रभावित और दुर्गम इलाकों में पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में केंद्रीय भूमिका निभाई थी।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से है गहरा नाता
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले अरुण देव गौतम का जन्म 2 जुलाई 1967 को यूपी के फतेहपुर जिले के अंतर्गत आने वाले अभयपुर गांव में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही एक शासकीय विद्यालय से संपन्न हुई, जिसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए इलाहाबाद (प्रयागराज) का रुख किया और वहां से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की।

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