महाकाल की सवारी में इस बार दिखेगा नया स्वरूप, लोकनृत्य करेंगे मंत्रमुग्ध
उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की पावन नगरी में सावन और भादो मास के दौरान निकलने वाली पारंपरिक सवारियों को लेकर तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। इस बार सावन-भादो माह में भगवान महाकालेश्वर की कुल छह भव्य सवारियाँ निकाली जाएँगी। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान का आगाज़ 3 अगस्त को सावन के पहले सोमवार से होने जा रहा है। इसके बाद क्रमशः 10 अगस्त को दूसरी, 17 अगस्त को तीसरी, 24 अगस्त को चौथी, 31 अगस्त को पाँचवीं और 7 सितंबर को अंतिम व विशाल शाही सवारी धूमधाम से निकाली जाएगी।
हर सवारी के लिए तय की गई विशेष थीम
इस वर्ष महाकाल बाबा की प्रत्येक सवारी को एक अनोखे और विशिष्ट विषय (थीम) पर केंद्रित किया गया है। प्रथम सवारी में 'वैदिक उद्बोधन' की गूँज सुनाई देगी, जिसमें पंडित और बटुक वेद मंत्रों का पाठ करते हुए चलेंगें। वहीं दूसरी सवारी लोक संस्कृति के रंगों से सजी होगी, जिसमें विभिन्न प्रांतों के लोक नृत्य दल अपनी कलात्मक प्रस्तुतियाँ देंगे। तीसरी सवारी में पुलिस, होमगार्ड, थल सेना, स्कूलों और निजी बैंडों का सुमधुर वादन श्रद्धालुओं का मन मोहेगा।
पर्यावरण संदेश और 84 महादेव की झांकी
चौथी सवारी का मुख्य आकर्षण पर्यावरण संरक्षण का संदेश रहेगा, जिसके माध्यम से प्रकृति सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाई जाएगी। इसके पश्चात पाँचवीं सवारी में उज्जैन के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को दर्शाती '84 महादेव' की भव्य झांकी शामिल की जाएगी, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगी।
शाही सवारी में दिखेगी सिंहस्थ 2028 की झलक
सवारी श्रृंखला के अंतिम पड़ाव यानी 7 सितंबर को निकलने वाली शाही सवारी को भव्य रूप दिया जाएगा। इसमें आगामी 'सिंहस्थ 2028' पर आधारित एक विशाल और आकर्षक झांकी निकाली जाएगी। इस दौरान पूरे सवारी मार्ग पर आकाश से ड्रोन के ज़रिए श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा की जाएगी, जिससे अवंतिका नगरी का माहौल पूरी तरह शिवमय हो उठेगा।

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