भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति यानी आयुर्वेद में गिलोय को बेहद गुणकारी और चमत्कारी बूटी माना गया है। जीवनदायिनी गुणों से भरपूर होने के कारण ही इसे 'अमृता' के नाम से भी पुकारा जाता है। यह न सिर्फ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को मजबूत करती है, बल्कि कई तरह के शारीरिक विकारों से बचाने में भी रामबाण मानी जाती है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बिगड़ी हुई जीवनशैली, असंतुलित खानपान और लगातार बढ़ते प्रदूषण की वजह से लोगों की प्रतिरक्षी प्रणाली कमजोर पड़ रही है। यही कारण है कि लोग अब केमिकल युक्त दवाओं के बजाय प्राकृतिक और हर्बल उपायों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसमें गिलोय सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरा है।

यदि गिलोय का उपयोग सही मात्रा और उचित परामर्श के अनुसार किया जाए, तो यह सेहत से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं को दूर करने में सहायक हो सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति के शरीर की तासीर अलग होती है, इसलिए किसी भी बीमारी में इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर या किसी योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ की राय जरूर लें।

गिलोय से मिलने वाले बेहतरीन स्वास्थ्य लाभ

1. रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) में जबरदस्त इजाफा

इसे एक बेहतरीन नेचुरल इम्यूनिटी बूस्टर माना जाता है। इसमें मौजूद प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर को मौसमी बीमारियों, वायरस और बैक्टीरियल संक्रमण से लड़ने की ताकत देते हैं।

2. पुराने और जिद्दी बुखार से राहत

आयुर्वेद में गिलोय का उपयोग बुखार को नियंत्रित करने और शरीर के तापमान को सामान्य करने के लिए लंबे समय से किया जा रहा है। यह प्लेटलेट्स बढ़ाने और शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद करती है। हालांकि, तेज बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

3. पाचन क्रिया को दुरुस्त बनाना

अगर आप कब्ज, गैस, एसिडिटी या अपच जैसी पेट की समस्याओं से परेशान हैं, तो गिलोय का सेवन आपके पाचन तंत्र को बेहतर बना सकता है। यह आंतों की सेहत को भी दुरुस्त रखता है।

4. टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर शरीर को करे डिटॉक्स

यह खून को साफ करने और शरीर में जमा हानिकारक टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थों) को बाहर निकालने में मदद करती है। इससे न सिर्फ त्वचा में चमक आती है, बल्कि शरीर अंदरूनी रूप से भी पूरी तरह स्वस्थ रहता है।

5. ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखना

कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, गिलोय मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों के लिए रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में सहायक हो सकती है। मगर इंसुलिन या शुगर की दवा ले रहे मरीज बिना चिकित्सीय परामर्श के इसका सेवन न करें, क्योंकि यह शुगर लेवल को बहुत कम कर सकती है।

6. जोड़ों के दर्द और सूजन से छुटकारा

इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी यानी सूजन रोधी गुण पाए जाते हैं, जो गठिया (आर्थराइटिस) के मरीजों को जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत दिलाने में मददगार साबित होते हैं।

गिलोय के सेवन के विभिन्न तरीके

  • रस (जूस): सुबह के समय खाली पेट गिलोय का ताजा जूस (डॉक्टर के परामर्श पर) गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है।

  • काढ़ा: गिलोय की डंडी को कूटकर पानी में उबाल लें और जब पानी आधा रह जाए तो उसे छानकर काढ़े के रूप में पिएं।

  • चूर्ण: गुनगुने पानी या शहद के साथ गिलोय के चूर्ण (पाउडर) का सेवन भी बेहद फायदेमंद है।

  • वटी (टैबलेट): बाजार में मिलने वाली गिलोय वटी या कैप्सूल का उपयोग भी किसी विशेषज्ञ के निर्देशानुसार किया जा सकता है।

सेवन के दौरान बरतें ये जरूरी सावधानियां

  • गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को डॉक्टर की सलाह के बिना इसका सेवन कतई नहीं करना चाहिए।

  • ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित मरीजों को इसके उपयोग से बचना चाहिए।

  • डायबिटीज की दवा खाने वाले लोग इसके इस्तेमाल में विशेष सावधानी बरतें और लगातार शुगर लेवल चेक करते रहें।

  • किसी भी चीज की अति नुकसानदेह होती है, इसलिए गिलोय का सीमित मात्रा में ही सेवन करें।

  • यदि इसे लेने के बाद शरीर में कोई असहजता, सिरदर्द या एलर्जी महसूस हो, तो तुरंत इसका सेवन बंद कर दें।