क्रिकेट को बड़ा झटका! NGT ने तीन प्रमुख स्टेडियमों में खेल गतिविधियों पर लगाई रोक
रायपुर। देश के विभिन्न राज्यों में लगातार गहराते जा रहे गंभीर जल संकट और गिरते भूजल स्तर के बीच नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। ट्रिब्यूनल ने एक बड़ा अंतरिम आदेश जारी करते हुए रायपुर, मुंबई और जयपुर स्थित देश के तीन प्रमुख और प्रतिष्ठित क्रिकेट स्टेडियमों में होने वाली सभी प्रकार की खेल गतिविधियों और आगामी मैचों पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। हरित न्यायाधिकरण के इस नए फरमान के बाद, अब अगली सुनवाई होने तक इन खेल परिसरों में किसी भी प्रकार के राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजन के लिए एनजीटी की अग्रिम लिखित अनुमति लेना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।
देश के इन तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियमों पर लागू हुआ हरित न्यायाधिकरण का यह प्रतिबंध
एनजीटी द्वारा जारी किए गए इस कड़े आदेश के दायरे में देश के तीन बड़े और नामचीन खेल मैदान शामिल हैं:
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छत्तीसगढ़: रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम.
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महाराष्ट्र: मुंबई का प्रसिद्ध डॉ. डी.वाई. पाटिल स्पोर्ट्स स्टेडियम.
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राजस्थान: जयपुर का ऐतिहासिक सवाई मानसिंह क्रिकेट स्टेडियम. ट्रिब्यूनल के इस स्पष्ट निर्देश के बाद इन तीनों ही खेल मैदानों की पिचों और परिसरों में फिलहाल आगामी आदेश तक किसी भी प्रकार की क्रिकेट प्रतियोगिता या अन्य खेल गतिविधियों का आयोजन पूरी तरह ठप रहेगा।
वाटर हार्वेस्टिंग और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के मानकों में मिलीं गंभीर कमियां, नोटिस का नहीं दिया संतोषजनक जवाब
मामले की विस्तृत सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने पाया कि इन तीनों संबंधित स्टेडियम प्रशासनों ने मैदानों के रखरखाव के लिए भूमिगत जल (ग्राउंड वाटर) के अंधाधुंध दोहन को रोकने के नियमों का गंभीर उल्लंघन किया है। इसके अलावा, परिसर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से साफ किए गए रीसायकल पानी का दोबारा उपयोग करने तथा वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) जैसी अनिवार्य और वैधानिक पर्यावरणीय प्रणालियों को सुचारू रूप से लागू करने में भारी लापरवाही बरती गई। ट्रिब्यूनल द्वारा पूर्व में कई बार कारण बताओ नोटिस और कड़े निर्देश जारी किए जाने के बावजूद, स्टेडियमों की ओर से कोई ठोस या संतोषजनक अनुपालन रिपोर्ट (कंप्लायंस रिपोर्ट) पेश नहीं की गई, जिसके चलते अदालत को अंततः यह सख्त अंतरिम प्रतिबंधात्मक कदम उठाना पड़ा।
प्राकृतिक संसाधनों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं, बड़े खेल संस्थानों को निभानी होगी अपनी जिम्मेदारी
एनजीटी ने अपने विस्तृत आदेश में साफ तौर पर रेखांकित किया है कि भारत के कई हिस्से इस समय पानी की भीषण किल्लत और सूखे जैसी स्थिति से जूझ रहे हैं। ऐसे नाजुक दौर में बड़े खेल परिसरों, अकादमियों और रसूखदार संस्थानों की यह नैतिक व कानूनी जिम्मेदारी बनती है कि वे प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन को रोकें और जल प्रबंधन के लिए तय किए गए वैश्विक मानकों का कड़ाई से पालन करें। ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण नियमों की इस प्रकार की जा रही लगातार अनदेखी को बेहद गंभीर और चिंताजनक माना है।
साल 2021 के ऐतिहासिक निर्देशों और 22 स्टेडियमों की जांच से जुड़ा है यह पूरा मामला
यह पूरा कानूनी विवाद वर्ष 2021 में एनजीटी द्वारा जारी किए गए उन ऐतिहासिक निर्देशों की कड़ी से जुड़ा हुआ है, जिसके तहत केंद्रीय खेल मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को देश के सभी बड़े खेल स्टेडियमों में भूजल के व्यावसायिक उपयोग को नियंत्रित करने तथा पानी के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक गाइडलाइन तैयार करने का आदेश दिया गया था। इसी योजना के अंतर्गत देश भर के 22 प्रमुख क्रिकेट स्टेडियमों से पर्यावरण नियमों के पालन की स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई थी। इसी जांच प्रक्रिया के दौरान रायपुर, मुंबई और जयपुर के इन तीन स्टेडियमों में नियमों की धज्जियां उड़ाए जाने की बात उजागर हुई।
17 अगस्त को तय की गई है अगली सुनवाई, चार हफ़्तों में मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
इस मामले को लेकर हरित न्यायाधिकरण ने अब केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) को कड़े निर्देश दिए हैं कि वह आगामी चार सप्ताह के भीतर इन तीनों खेल मैदानों का भौतिक निरीक्षण करे और नियमों के उल्लंघन को लेकर एक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे। एनजीटी ने इस संवेदनशील मामले की अगली न्यायिक सुनवाई के लिए 17 अगस्त की तारीख मुकर्रर की है। तब तक के लिए, बिना एनजीटी की विशेष मंजूरी के इन तीनों ही स्टेडियमों के मुख्य द्वारों पर ताला लटका रहेगा और किसी भी तरह के खेल के लिए हरी झंडी नहीं मिल सकेगी।

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