बारिश में खानपान की लापरवाही पड़ सकती है भारी, डायरिया और पेट दर्द पर रखें नजर
वर्षा ऋतु का सुहावना मौसम अपने साथ कई तरह की संक्रामक बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को भी लेकर आता है। मानसून के दस्तक देते ही देश भर के चिकित्सालयों में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग (खाद्य विषाक्तता) से पीड़ित मरीजों की संख्या में अचानक भारी उछाल देखने को मिलता है। इस मौसम में फूड पॉइजनिंग का प्रकोप इतना तीव्र होता है कि बड़ी संख्या में पीड़ितों को गंभीर स्थिति के कारण अस्पतालों में भर्ती तक कराना पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क किनारे खुले में मिलने वाले दूषित पेय पदार्थ, चाट-पकौड़े या लंबे समय से फ्रिज में रखे बासी भोजन का सेवन करने से यह समस्या तेजी से विकराल रूप ले लेती है।
एक बड़ी व्यावहारिक समस्या यह भी है कि पेट में हल्का दर्द होने पर अधिकांश लोग यह समझ ही नहीं पाते कि यह सामान्य अपच (गैस) की दिक्कत है या फिर किसी गंभीर फूड पॉइजनिंग की शुरुआत? कई लोग बार-बार होने वाली उल्टी और दस्त को बेहद सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे पीड़ित के शरीर में बहुत कम समय में पानी और आवश्यक मिनरल्स (इलेक्ट्रोलाइट्स) की अत्यधिक कमी हो जाती है। इस स्थिति में बिना किसी योग्य चिकित्सक के परामर्श के स्वतः ही दर्द निवारक (पेन किलर्स) या हैवी एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करना बीमारी को और अधिक जानलेवा बना सकता है।
बरसात के मौसम में जीवाणुओं का हमला, दूषित खान-पान से संक्रमण की रफ्तार तेज
चिकित्सकों के मुताबिक, बारिश के दिनों में वायुमंडल में नमी (ह्यूमिडिटी) का स्तर बहुत बढ़ जाता है, जो साल्मोनेला और ई.कोलाई जैसे बेहद खतरनाक बैक्टीरिया व फंगस को पनपने के लिए सबसे अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। इन सूक्ष्म जीवाणुओं से दूषित पानी और भोजन के सीधे संपर्क में आने से ही लोग फूड पॉइजनिंग का शिकार बनते हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानसून के इन महीनों में खान-पान की स्वच्छता, उबला या साफ पानी पीने और केवल ताजा बना गर्म भोजन ग्रहण करने की सख्त हिदायत देते हैं।
वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट का कहना है कि यदि फूड पॉइजनिंग के शुरुआती लक्षणों और शारीरिक संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो अधिकांश मामलों में मरीज बिना अस्पताल जाए घर पर ही कुछ दिनों में पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है। परंतु, यदि ये लक्षण लगातार गंभीर होते जाएं या लंबे समय तक बने रहें, तो बिना समय गंवाए आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना अनिवार्य हो जाता है।
खुले खाद्य पदार्थ और मक्खियां बन रही हैं पेट के संक्रमण का मुख्य कारण
इस मौसम में यदि पके हुए भोजन को सामान्य तापमान पर थोड़े समय के लिए भी खुला छोड़ दिया जाए, तो उसमें हानिकारक सूक्ष्मजीव बहुत तेजी से अपनी संख्या बढ़ाने लगते हैं। सड़क किनारे खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, अस्वच्छ पानी से बनी बर्फ, और पहले से कटे हुए फल व सब्जियां इस संक्रमण के मुख्य स्रोत माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त, मानसून में मक्खियों का प्रकोप भी चरम पर होता है, जो कचरे और गंदगी से घातक बैक्टीरिया अपने पैरों में चिपकाकर सीधे आपके भोजन तक पहुंचा देती हैं, जिससे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक में गंभीर संक्रमण (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) फैल जाता है।
कैसे पहचानें अंतर? सामान्य पेट दर्द बनाम फूड पॉइजनिंग के मुख्य लक्षण
दोनों समस्याओं में अंतर को बहुत ही आसानी से समझा जा सकता है:
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सामान्य पेट दर्द: यह अमूमन पेट में गैस बनने, अपच होने या अचानक बहुत अधिक हैवी खाना खा लेने की वजह से होता है। यह दर्द पेट के किसी एक हिस्से में होता है और थोड़ी देर आराम करने या घरेलू उपचार से स्वतः ही ठीक हो जाता है।
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फूड पॉइजनिंग के लक्षण: यदि पेट दर्द के साथ-साथ आपको लगातार उल्टी आना, तेज मतली (जी मिचलाना), लगातार पतले दस्त होना, शरीर में कँपकँपी के साथ तेज बुखार, अत्यधिक शारीरिक कमजोरी या पेट में मरोड़ (ऐंठन) जैसी गंभीर शिकायतें हो रही हैं, तो यह स्पष्ट रूप से फूड पॉइजनिंग का संकेत है। इसके अतिरिक्त, कुछ गंभीर मामलों में शौच के साथ खून आने और तेज सिरदर्द की समस्या भी देखी जाती है। यदि ये लक्षण 24 से 48 घंटों से अधिक समय तक बने रहें, तो यह डिहाइड्रेशन का रूप ले सकते हैं।
संक्रमण होने पर क्या करें प्राथमिक उपचार? डॉक्टरों की विशेष सलाह
यदि आपके या परिवार के किसी सदस्य के भीतर फूड पॉइजनिंग के लक्षण दिखाई दें, तो सबसे पहले निम्नलिखित प्राथमिक कदम उठाएं:
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इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन: शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) को रोकने के लिए ओआरएस (ORS) का घोल, ओला हुआ साफ पानी, ताजा नारियल पानी और नींबू-पानी जैसे तरल पदार्थों का लगातार सेवन करते रहें।
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हल्का भोजन: शुरुआती दौर में पेट को आराम देने के लिए पूरी तरह से सादा, कम तेल-मसाले वाला और आसानी से पचने वाला हल्का भोजन जैसे मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया या छाछ ही लें।
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दवाइयों से बचें: कभी भी बिना डॉक्टर के पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) के खुद से दस्त रोकने वाली या कोई भी एंटीबायोटिक दवा न खाएं, क्योंकि ऐसा करने से पेट के भीतर मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया अंदर ही रुक जाते हैं जो बाद में आंतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
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अस्पताल कब जाएं: यदि लगातार उल्टी के कारण शरीर में पानी न टिक रहा हो, तेज बुखार हो या मल में खून के अंश दिखें, तो तुरंत नजदीकी आपातकालीन चिकित्सा केंद्र या अस्पताल का रुख करें।

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