अल्मेरिया। स्पेन के अल्मेरिया प्रांत में जंगलों में लगी भीषण आग ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें कम से कम 12 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। सिएरा डे लॉस फिलाब्रेस पहाड़ियों के निकट स्थित यह इलाका बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों का बसेरा है, जो अब राख में तब्दील हो चुका है। आग के कारण 23 लोग लापता हैं और 3,200 हेक्टेयर से अधिक भूमि जलकर नष्ट हो गई है। बचाव दल अब भी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

आपातकालीन दिशा-निर्देशों की अनदेखी बनी जानलेवा

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मौतों का प्रमुख कारण सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह को न मानना रहा। कई निवासियों ने घबराहट में कारों के जरिए भागने का प्रयास किया या पैदल ही निकल पड़े, जो कि आग की भीषण लपटों के बीच खतरनाक साबित हुआ। अधिकारियों ने बताया कि कुछ लोग सूखी नदी के रास्ते सुरक्षित निकलने की कोशिश में फंस गए, जो उनके लिए जानलेवा साबित हुआ। मरने वालों में चार ब्रिटिश नागरिकों के होने की पुष्टि उनके वाहन के मॉडल (दाहिनी ओर स्टीयरिंग) से की जा रही है, जबकि अन्य सात लोगों की मौत पैदल भागते समय हुई।

प्रतिकूल भौगोलिक परिस्थितियों से बढ़ी चुनौती

इस विनाशकारी आग को बुझाने के लिए 150 दमकलकर्मी और मिलिट्री इमरजेंसी यूनिट के 220 जवान दिन-रात संघर्ष कर रहे हैं। सिएरा डे लॉस फिलाब्रेस की ऊबड़-खाबड़ जमीन, सूखी झाड़ियां और तेज हवाओं ने राहत कार्यों को अत्यंत कठिन बना दिया है। भीषण हीटवेव के कारण पूरा क्षेत्र बारूद की तरह ज्वलनशील हो चुका है, जिससे आग एक स्थान से दूसरे स्थान पर तेजी से फैल रही है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने इस हृदयविदारक घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

यूरोप पर जलवायु परिवर्तन का गहरा प्रभाव

यह घटना पूरे यूरोप में व्याप्त भीषण गर्मी और सूखे का परिणाम है। कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के आंकड़ों के अनुसार, यूरोप विश्व का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है, जहां 1980 के दशक के बाद तापमान वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी गति से बढ़ रहा है। स्पेन के अलावा फ्रांस भी इसी तरह के संकट से जूझ रहा है, जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। लगातार बढ़ती गर्मी के चलते हज़ारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना पड़ रहा है, जो भविष्य के लिए एक बड़ी पर्यावरणीय चुनौती है।