इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर को अब देश का सबसे हरा-भरा शहर बनाने के लिए एक बार फिर व्यापक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण की मुहिम शुरू होने जा रही है। पर्यावरण और प्रकृति को सहेजने के संकल्प के साथ इस वर्ष फिर एक विशाल पौधारोपण अभियान की रूपरेखा तैयार की गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत पूरे जिले और उसके आस-पास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में लाखों नए पौधे रोपकर धरती का श्रृंगार करने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत लगेगा पौधों का महालगाम

इस बार 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को एक जन आंदोलन का रूप दिया जा रहा है, जिसके तहत कुल 21 लाख पौधे लगाने का विशाल लक्ष्य रखा गया है। इस महा-अभियान की औपचारिक शुरुआत सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के बुढ़ानिया परिसर से होने जा रही है, जहां एक ही दिन में एक लाख पौधों का रोपण कर इस पुनीत कार्य का श्रीगणेश किया जाएगा। इस बार प्रशासन और पर्यावरण प्रेमियों ने मिलकर उन पौधों को प्राथमिकता दी है जिनकी ऊंचाई छह से दस फीट के बीच है, ताकि उनके जीवित रहने की संभावना शत-प्रतिशत रहे और वे बेहद कम समय में घने व छायादार वृक्ष का रूप ले सकें।

शहर के इन प्रमुख और ऐतिहासिक स्थलों पर महकेगी मां की बगिया

इंदौर और उसके आस-पास के कई प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों को हरा-भरा करने के लिए स्थान चिह्नित कर लिए गए हैं, जिसमें देवगुराड़िया के पीछे स्थित टेकरी पर एक लाख से अधिक तथा सिरपुर तालाब के पास भी एक लाख पौधे रोपे जाएंगे। इसके साथ ही राऊ तालाब के आस-पास दस हजार पौधों के रोपण समेत वन विभाग की विभिन्न जमीनों पर चरणबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा। इस पूरी मुहिम में 'मां की बगिया' योजना को विशेष रूप से शामिल किया गया है, जिसके अंतर्गत केवल फलदार और औषधीय प्रजातियों जैसे जामुन, आम, कटहल, नीम, पीपल, बरगद, नींबू, संतरा और अनार के पौधे लगाए जा रहे हैं ताकि भविष्य में पशु-पक्षियों और मानव जाति को इसका पूरा लाभ मिल सके।

स्वच्छता के बाद अब हरियाली के कीर्तिमान की ओर अग्रसर हुआ इंदौर

सफाई के मामले में लगातार सात बार देश में डंका बजाने के बाद अब इंदौर का मुख्य फोकस पर्यावरण सुधार पर केंद्रित हो गया है। बीते वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पहले चरण में 51 लाख और दूसरे चरण में 15 लाख से अधिक पौधों का रोपण कर शहर ने एक मिसाल कायम की थी। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए इस बार जुलाई माह के शुरुआती दिनों से ही यह काम शुरू हो चुका है, जिसके तहत अब तक ढाई लाख से ज्यादा पौधे जमीन में रोपे जा चुके हैं। बीएसएफ बुढ़ानिया की पथरीली जमीन पर पौधों के संरक्षण के लिए यशवंत सागर से विशेष पाइपलाइन बिछाकर सिंचाई की मुकम्मल व्यवस्था भी की गई है।

पौधारोपण के साथ जल संवर्धन और भूजल सुधार की अनूठी पहल

इस वर्ष के पर्यावरण अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे केवल पेड़ लगाने तक सीमित न रखकर जल संरक्षण के एक बड़े अभियान से भी जोड़ दिया गया है। 'पेड़ लगाओ, पानी बचाओ' के मूल मंत्र के साथ इस बार जिले के 51 हजार घरों में वर्षा जल संचयन यानी रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं तैयार करने का लक्ष्य है। इस तकनीकी प्रयास का सीधा उद्देश्य बारिश के अनमोल पानी को सहेजकर उसे जमीन के भीतर पहुंचाना है, जिससे शहर के लगातार गिरते भूजल स्तर में सुधार लाया जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।