राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में खेल मैदानों के गैर-खेल और राजनीतिक आयोजनों के लिए उपयोग को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शहर के स्थानीय खिलाड़ियों, खेल प्रशिक्षकों और खेल प्रेमियों ने स्टेट हाई स्कूल मैदान में प्रस्तावित मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आगामी कार्यक्रम का कड़ा विरोध करते हुए मैदान के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते खेल मैदानों का बार-बार गैर-खेल आयोजनों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे मैदानों की स्थिति बदतर हो रही है और खिलाड़ियों की नियमित खेल गतिविधियां व अभ्यास बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर पहुंचे खिलाड़ी, जताया कड़ा विरोध

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर मैदान में चल रही प्रशासनिक तैयारियों और टेंट-स्टेज निर्माण के बीच बड़ी संख्या में विभिन्न खेलों के खिलाड़ी और खेल प्रेमी मैदान के मुख्य द्वार पर एकत्रित हो गए। प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में तख्तियां, बैनर और पोस्टर ले रखे थे, जिनके माध्यम से उन्होंने जिला प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। खिलाड़ियों का तर्क था कि जब शहर और उसके आसपास अन्य वैकल्पिक सरकारी स्थान व खुले मैदान उपलब्ध हैं, तो जानबूझकर केवल सुव्यवस्थित खेल मैदानों को ही बड़े आयोजनों का मंच क्यों बनाया जाता है।

हंगामे के बाद पुलिस ने संभाला मोर्चा, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

खिलाड़ियों के उग्र विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन भारी बल के साथ मौके पर पहुंचा। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को मुख्य कार्यक्रम स्थल के समीप से हटाना शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। वीआईपी कार्यक्रम की तैयारियों में किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो, इसके लिए पुलिस ने कुछ प्रमुख प्रदर्शनकारियों को सरकारी वाहनों में बैठाकर वहां से दूर दूसरे स्थान पर भेज दिया और मैदान के चारों तरफ सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया।

'आयोजनों के बाद बर्बाद हो जाती है मैदान की सतह' — खेल प्रेमियों का आरोप

प्रदर्शन में शामिल खेल प्रशिक्षकों का आरोप है कि इस तरह के बड़े शासकीय और राजनीतिक आयोजनों के कारण मैदानों में भारी वाहनों की आवाजाही होती है और गड्ढे खोदे जाते हैं, जिससे मैदान की समतल सतह (आउटफील्ड) पूरी तरह खराब हो जाती है। इसके चलते खिलाड़ियों को भविष्य में अभ्यास करने और बड़ी राज्य या राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं की तैयारी करने में गंभीर चोटों का खतरा बढ़ जाता है। खिलाड़ियों ने कहा कि वीआईपी कार्यक्रम तो चंद घंटों में खत्म हो जाते हैं, लेकिन उनके बाद क्षतिग्रस्त हुए मैदानों को दोबारा खेलने लायक सामान्य स्थिति में लाने में महीनों का समय और लाखों रुपये का खर्च आता है, जिसका सीधा नुकसान खेल प्रतिभाओं को उठाना पड़ता है।

शासकीय कार्यक्रमों के लिए वैकल्पिक और स्थायी स्थल बनाने की मांग

आक्रोशित खिलाड़ियों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से पुरजोर मांग की है कि राजनांदगांव शहर में शासकीय, अर्धशासकीय और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए एक अलग स्थायी मेला ग्राउंड या कन्वेंशन सेंटर विकसित किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि खेल मैदानों को कानूनी रूप से केवल और केवल खिलाड़ियों के अभ्यास और खेल प्रतियोगिताओं के लिए ही आरक्षित रखा जाना चाहिए। खेल संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि इस पुरानी समस्या का कोई स्थायी और व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला गया, तो भविष्य में भी खेल समुदाय इसी तरह लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेगा।

पहले भी कई बार गरमा चुका है मैदानों की बदहाली का यह मुद्दा

गौरतलब है कि राजनांदगांव में खेल मैदानों के व्यावसायिक और राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर विरोध का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई मौकों पर शहर के फुटबॉल, क्रिकेट और एथलेटिक्स से जुड़े खिलाड़ी और खेल संगठन मैदानों में गैर-खेल गतिविधियों के खिलाफ सड़कों पर उतर चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर इच्छाशक्ति की कमी के कारण अब तक इस समस्या का कोई ठोस विकल्प नहीं तलाशा जा सका है, जिसके चलते स्थानीय खेल समुदाय में शासन-प्रशासन के खिलाफ लगातार नाराजगी और असंतोष बढ़ता जा रहा है।