अंबिकापुर।छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंतर्गत आने वाले आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र सीतापुर से मानव तस्करी और जबरन बंधक बनाए जाने की एक बेहद गंभीर और रूह कँपा देने वाली खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, सीतापुर विधानसभा क्षेत्र की तीन स्थानीय युवतियों को सिलाई प्रशिक्षण (टेलरिंग ट्रेनिंग) और बेहतर रोजगार दिलाने का झांसा देकर उनके घर से सुदूर चेन्नई ले जाया गया था। अब वहां से इन युवतियों को कथित तौर पर बेचे जाने और प्रताड़ित कर बंधक बनाए रखने की बेहद चिंताजनक बात प्रकाश में आई है।

सिलाई ट्रेनिंग का झांसा देकर पहले जशपुर और फिर ले गए चेन्नई

घटनाक्रम के अनुसार, 1 जून को कुछ अज्ञात बिचौलियों और संदिग्ध तत्वों द्वारा इन युवतियों को जशपुर में गारमेंट सिलाई की ट्रेनिंग देने तथा बाद में अच्छे वेतन पर नौकरी दिलाने का लालच दिया गया था। योजना के तहत 1 जून से ठीक पहले इन लड़कियों को सीतापुर क्षेत्र से निकालकर जशपुर ले जाया गया। वहां कुछ दिनों तक उन्हें एक गुप्त स्थान पर रखा गया और फिर झांसे में लेकर सीधे चेन्नई रवाना कर दिया गया।

इस पूरे सुनियोजित नेक्सस का पर्दाफाश तब हुआ, जब आज सुबह किसी तरह इन तीनों पीड़ित युवतियों ने सीतापुर क्षेत्र के विधायक रामकुमार टोप्पो से मोबाइल पर संपर्क किया और रोते हुए खुद के बंधक बनाए जाने की दर्दनाक दास्तां सुनाई।

पीड़ित लड़कियों ने विधायक को भेजी लाइव लोकेशन, सरगुजा एसपी से मांगी मदद

युवतियों ने विधायक रामकुमार टोप्पो को फोन पर आपबीती बताते हुए कहा कि उन्हें चेन्नई में कपड़ा सिलाई उद्योग (गारमेंट फैक्ट्री) से जुड़े एक बेहद कड़े सुरक्षा वाले स्थान पर जबरन कैद करके रखा गया है। वहां उनकी स्थिति बिल्कुल भी सामान्य नहीं है और उन पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है। चतुरता दिखाते हुए लड़कियों ने अपने मोबाइल फोन के जरिए विधायक के साथ अपनी लाइव लोकेशन भी साझा की है, जिससे उनके सटीक ठिकाने को ट्रैक करने में बड़ी मदद मिल सकती है।

मामले की भयावहता और संवेदनशीलता को देखते हुए विधायक रामकुमार टोप्पो ने बिना वक्त गंवाए तुरंत सरगुजा पुलिस अधीक्षक (SP) से व्यक्तिगत संपर्क साधा और इस मामले में आपातकालीन इंटर-स्टेट एक्शन लेने की मांग की। विधायक ने पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया है कि छत्तीसगढ़ की इन बेटियों को हर हाल में सुरक्षित और सकुशल वापस लाया जाए।

सरगुजा और चेन्नई पुलिस का संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू

उच्च स्तर से मिले कड़े निर्देशों के बाद सरगुजा पुलिस फौरन हरकत में आ गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ पुलिस ने तमिलनाडु की चेन्नई पुलिस के साथ समन्वय (कोऑर्डिनेशन) स्थापित कर लिया है और एक विशेष रेस्क्यू टीम का गठन कर बंधक बनाई गई युवतियों को छुड़ाने के लिए ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार कर ली है। पुलिस साइबर सेल की मदद से युवतियों द्वारा भेजी गई मोबाइल लोकेशन और संदिग्ध मोबाइल नंबरों के आधार पर आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की तैयारी कर रही है।

मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क पर उठे गंभीर सवाल

फिलहाल इस पूरे मामले में सरगुजा पुलिस की ओर से किसी आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है। जांच अधिकारियों का कहना है कि युवतियों को सुरक्षित रेस्क्यू कर वापस छत्तीसगढ़ लाने और मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही यह पूरी तरह साफ हो सकेगा कि इस घिनौने कृत्य के पीछे अंतर्राज्यीय मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) का कितना बड़ा गिरोह सक्रिय है।

लेकिन इस दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों में सक्रिय उन फर्जी प्लेसमेंट एजेंसियों और दलालों के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो स्थानीय युवाओं और खासकर मासूम लड़कियों को सुनहरे भविष्य का सपना दिखाकर बाहरी राज्यों के दलदल में धकेल देते हैं।