बिजली कर्मचारियों की चेतावनी, पुरानी पेंशन लागू नहीं हुई तो आंदोलन होगा तेज
रायपुर। छत्तीसगढ़ में चौबीसों घंटे बिना किसी रुकावट के बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटे विद्युत विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर लिया है। 'छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल अभियंता संघ' ने प्रदेश की शासकीय बिजली कंपनियों में 1 नवंबर 2004 के बाद सेवा में आए तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को तत्काल प्रभाव से बहाल करने की पुरजोर मांग उठाई है।
मुख्यमंत्री से मिलकर सौंपा विस्तृत मांग पत्र
इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय को लेकर अभियंता संघ के प्रांतीय अध्यक्ष राजेश पांडेय और महासचिव डॉ. मनोज वर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से औपचारिक मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। सौंपे गए मांग पत्र में स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश के लगभग आठ हजार बिजली कर्मियों और उनके आश्रितों के सामाजिक व आर्थिक भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए राज्य में पुरानी पेंशन योजना लागू करना बेहद आवश्यक हो गया है।
'24 घंटे जान जोखिम में डालकर कर रहे काम, फिर भेदभाव क्यों?' — संघ
अभियंता संघ के पदाधिकारियों ने अपनी कार्यस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि बिजली कंपनियों के इंजीनियर्स, तकनीकी अधिकारी और मैदानी स्तर पर तैनात फील्ड कर्मचारी चौबीसों घंटे अपनी जान जोखिम में डालकर बेहद कठिन हालात में जनता की सेवा करते हैं। आंधी-तूफान, मूसलाधार बारिश या उत्तर भारत की भीषण गर्मी जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी राज्य की विद्युत व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी इन्हीं कर्मचारियों के कंधों पर होती है।
संघ का तर्क है कि जब छत्तीसगढ़ राज्य सरकार अपने अन्य सभी शासकीय विभागों के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का पूर्ण लाभ दे रही है, तो ऐसी स्थिति में दिन-रात जोखिम उठाने वाले विद्युत कंपनियों के जांबाज कर्मचारियों को इस सामाजिक सुरक्षा से वंचित रखना पूरी तरह से भेदभावपूर्ण और निराशाजनक रवैया है। बिजली कर्मियों ने उम्मीद जताई है कि सरकार उनके योगदान को देखते हुए जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक फैसला लेगी।

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