कार्रवाई की मांग को लेकर पिता-पुत्र का विरोध, एसपी ऑफिस में पेट्रोल डालने से मचा हड़कंप
छतरपुर। जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के मुख्य परिसर के बाहर मंगलवार को उस समय अचानक अफरा-तफरी और हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई, जब एक पीड़ित युवक ने अपने मासूम बेटे के साथ खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह करने की कोशिश की। वहां मुस्तैद पुलिस जवानों और राहगीरों ने सूझबूझ और तत्परता दिखाते हुए फौरन दोनों को काबू में किया और समय रहते एक बेहद खौफनाक हादसे को टाल दिया। हालांकि, सरेराह घटित हुए इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग प्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
चोरी का माल बरामदगी के बाद भी न मिलने का आरोप
आत्मघाती कदम उठाने वाले पीड़ित प्रमोद तिवारी का सीधा आरोप है कि करीब दो साल पहले उनके निवास स्थान से लाखों रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात चोरी हो गए थे। इस मामले में उन्होंने तत्कालीन नौगांव थाना प्रभारी सतीश सिंह और स्थानीय पुलिस अमले पर संगीन आरोप मढ़े हैं। पीड़ित का कहना है कि पुलिस की कथित सांठगांठ के चलते उनका चोरी गया शत-प्रतिशत सामान बरामद होने के बावजूद आज तक उन्हें कानूनी तौर पर वापस नहीं सौंपा गया, जिससे वे न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
55 से ज्यादा शिकायती आवेदन बेअसर, न्यायालय को भी गुमराह करने का दावा
प्रमोद तिवारी ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि हक की लड़ाई में वे पिछले दो वर्षों से लगातार विभिन्न प्रशासनिक चौखटों और आला अधिकारियों के दफ्तरों की खाक छान रहे हैं। उनके मुताबिक, वे अब तक अलग-अलग फोरम पर 55 से अधिक लिखित शिकायतें दर्ज करा चुके हैं, परंतु किसी भी स्तर पर ठोस या संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई। हारकर उन्होंने इस मामले में उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन उनका आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने अदालत के समक्ष झूठी और भ्रामक रिपोर्ट पेश कर दी, जिसके कारण उन्हें वहां से भी कोई तात्कालिक राहत नहीं मिल सकी।
आर्थिक तंगी और मानसिक अवसाद से जूझ रहा परिवार
लगातार कानूनी लड़ाइयों और प्रशासनिक उदासीनता के चलते पीड़ित का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है। उन्होंने बताया कि पुलिस महकमे के इस अड़ियल और ठंडे रवैये के कारण उनका पूरा परिवार इस समय गहरे आर्थिक संकट और मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहा है। इसी हताशा और बेबसी के चलते उन्हें जिला मुख्यालय छतरपुर में पुलिस कप्तान के दफ्तर के ठीक बाहर अपनी और अपने बच्चे की जान जोखिम में डालने जैसा आत्मघाती कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ा।
मुख्यमंत्री से गुहार लगाने की मांग
पीड़ित प्रमोद तिवारी ने पुरजोर मांग की है कि उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से व्यक्तिगत रूप से मिलने का समय दिलाया जाए, ताकि वे इस पूरे मामले की कड़वी सच्चाई और पुलिसिया लापरवाही के दस्तावेज सीधे उनके समक्ष प्रस्तुत कर सकें। उनका साफ कहना है कि जब तक शासन स्तर से इस मामले में कोई ठोस और निष्पक्ष आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे चुप नहीं बैठेंगे।
अधिकारियों ने दी समझाइश, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौन
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। मौके पर पहुंचे वरिष्ठ अधिकारियों ने पीड़ित को ढांढस बंधाया, निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया और मामले की पूरी रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजने का आश्वासन देकर शांत कराया। फिलहाल इस संवेदनशील मामले को लेकर पूरे अंचल में तीखी चर्चाएं चल रही हैं। इस पूरे प्रकरण और लगे आरोपों पर जब जिले के आला पुलिस अधिकारियों से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। मामले में पुलिस का पक्ष आते ही अग्रिम विवरण साझा किया जाएगा।

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