बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में दो मासूम बच्चियों से हुए दुष्कर्म के मामले में जांच के दौरान गंभीर लापरवाही बरतने पर पुलिस प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री से इस विषय में शिकायत किए जाने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए सिरगिट्टी थाना प्रभारी अभय सिंह बैस और विवेचना अधिकारी सब-इंस्पेक्टर (एसआई) संतोषी अग्रवाल को लाइन अटैच कर दिया है।

इस प्रशासनिक फेरबदल के बाद जिला विशेष शाखा में पदस्थ निरीक्षक वायपी सिंह को सिरगिट्टी थाने की नई कमान सौंपी गई है, जबकि पचपेड़ी थाने का प्रभार निरीक्षक कमला पुसाम को दिया गया है। एसएसपी रजनेश सिंह द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

जांच के दौरान सामने आईं ये गंभीर खामियां

आधिकारिक आदेश के अनुसार, सिरगिट्टी थाने में दर्ज इस संवेदनशील और नाबालिगों से जुड़े मामले की तफ्तीश में गंभीर लापरवाही पाई गई। थाना प्रभारी अभय सिंह बैस पर आरोप है कि उन्होंने घटना के बाद खुद मौके (घटनास्थल) का मुआयना तक नहीं किया। इसके अलावा, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 176(3) के नियमों का उल्लंघन भी सामने आया है।

नियमों के मुताबिक, सात वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले ऐसे गंभीर मामलों में 'सीन ऑफ क्राइम यूनिट' (फॉरेंसिक टीम) को बुलाना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। इसी तरह विवेचना अधिकारी एसआई संतोषी अग्रवाल भी साक्ष्यों को जुटाने और शुरुआती जांच प्रक्रिया में अपेक्षित गंभीरता दिखाने में नाकाम रहीं, जिसे जांच में बड़ी चूक माना गया है।

7 दिनों के भीतर मांगी गई रिपोर्ट

एसएसपी ने इस पूरे घटनाक्रम और पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर सिविल लाइन सीएसपी को विस्तृत जांच सौंपते हुए सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

क्या था पूरा मामला?

सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में एक 17 वर्षीय नाबालिग ने चॉकलेट देने के बहाने से सात वर्ष की दो मासूम बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाया था। आरोपी ने बच्चियों के साथ मारपीट भी की थी और उनके पैर रस्सी से बांध दिए थे। जब पीड़ितों के परिजनों ने आरोपी को पकड़ने का प्रयास किया, तो वह मौके से फरार होने में कामयाब रहा। इस गंभीर घटना के बाद से ही पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे थे, जिसके बाद अब यह बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की गई है।