शिप्रा तट पर उमड़े श्रद्धालु, उज्जैन में धार्मिक माहौल चरम पर
उज्जैन: पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) के अंतिम दिन आए सोमवती अमावस्या के महापर्व ने धार्मिक नगरी उज्जैन को एक बार फिर पूरी तरह आस्था और श्रद्धा के रंग में सराबोर कर दिया। सोमवार के विशेष संयोग के कारण अलसुबह सूर्योदय से पहले ही मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के तटों पर देश भर से आए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट और सोमकुंड पर पवित्र स्नान के लिए श्रद्धालुओं की इतनी भारी भीड़ थी कि उज्जैन की सड़कों और घाटों पर सिंहस्थ कुंभ मेला जैसा विहंगम नजारा दिखाई दे रहा था। इस दौरान श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर विशेष पूजा-पाठ, दान-पुण्य और अपने पितरों के निमित्त तर्पण किया।
अधिकमास के समापन पर अमृत सिद्धि योग का महासंयोग
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार की सोमवती अमावस्या बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक रही, क्योंकि यह पूरे एक महीने तक चलने वाले पुरुषोत्तम मास यानी अधिकमास के ठीक अंतिम दिन आई। इसके साथ ही इस दिन मृगशिरा नक्षत्र और अमृत सिद्धि योग का एक साथ अनूठा महासंयोग बना।
धर्माचार्यों का मानना है कि इस दिव्य योग में किए गए जप, तप, ध्यान और दान का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है। इसी धार्मिक महत्ता के चलते मध्य प्रदेश के कोने-कोने के अलावा राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों से भी लाखों लोग उज्जैन पहुंचे। शिप्रा तट पर हजारों परिवारों ने विश्व कल्याण और अपने घर की सुख-समृद्धि के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान और हवन आयोजित किए।
पितृ तर्पण और दोपहर में हुआ सूर्य का राशि परिवर्तन
सोमवती अमावस्या की तिथि पितरों की आत्मशांति और दोष निवारण के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। यही कारण रहा कि सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं ने पुरोहितों के सानिध्य में शिप्रा नदी के घाटों पर बैठकर पूर्वजों के निमित्त पिंडदान, श्राद्ध कर्म और जल तर्पण किया।
इस दिन का ज्योतिषीय महत्व उस समय और बढ़ गया जब दोपहर के समय सूर्य देव ने वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश किया (सूर्य गोचर)। ज्योतिष शास्त्र के दृष्टिकोण से सूर्य का यह राशि परिवर्तन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो देश की अर्थव्यवस्था और कई राशियों पर बेहद सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
महाकाल मंदिर में उमड़ा जनसैलाब और प्रशासनिक व्यवस्थाएं
सुरक्षा और व्यवस्था की झलक: शिप्रा नदी में मुख्य स्नान के बाद श्रद्धालुओं का पूरा रेला विश्व प्रसिद्ध भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन के लिए उमड़ पड़ा। महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती से लेकर दोपहर तक भक्तों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लगी रहीं। भक्तों ने 'जय महाकाल' के उद्घोष के साथ बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया।
लाखों की तादाद में आए इस जनसैलाब को नियंत्रित करने के लिए उज्जैन जिला प्रशासन और पुलिस बल ने घाटों से लेकर मुख्य मंदिरों तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। गहरे पानी की तरफ बैरिकेडिंग की गई थी और नदी में होमगार्ड के गोताखोर लगातार बोट्स के जरिए निगरानी कर रहे थे। जगह-जगह पर खोया-पाया केंद्र और अतिरिक्त चिकित्सा शिविर भी लगाए गए थे, जिससे बिना किसी अप्रिय घटना के यह महापर्व बेहद शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

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