रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी के पंडरी क्षेत्र में देश की विविध संस्कृतियों को समेटने वाले 'पीएम एकता मॉल' (पीएम यूनिटी मॉल) का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस भव्य मॉल की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि यहाँ देश के अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक हस्तशिल्प (हैंडीक्राफ्ट), लोक कलाएं और स्थानीय उत्पाद एक ही जगह पर खरीदे जा सकेंगे। इसे पूरी तरह से 'मिनी इंडिया' की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है, जहाँ आने वाले लोग पूरे भारत की कला, संस्कृति और खान-पान का जीवंत अनुभव एक ही छत के नीचे ले सकेंगे।

193 करोड़ रुपये का बजट और 6 मंजिला भव्य ढांचा

लगभग 4 एकड़ के विशाल भूभाग पर बन रहे इस आधुनिक मॉल को सर्वसुविधाजनक बनाया जा रहा है, जिसमें वाहनों के लिए बड़ी पार्किंग व्यवस्था भी शामिल है। कुल 193 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस 6 मंजिला इमारत का खाका कुछ इस तरह तय किया गया है:

  • ग्राउंड फ्लोर: यहाँ मौसमी परिधान (सीजनल क्लोदिंग) और बागवानी (गार्डनिंग) से जुड़े उत्पाद मिलेंगे।

  • दूसरा फ्लोर: यह मंजिला पूरी तरह देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक दुकानों और हस्तशिल्प के लिए आरक्षित होगी।

  • तीसरा और चौथा फ्लोर: यहाँ आने वाले लोगों के मनोरंजन के लिए गेमिंग ज़ोन, एक्टिविटी एरिया और एक बड़ा फूड कोर्ट बनाया जा रहा है।

  • पांचवां और छठा फ्लोर: कलात्मक आयोजनों के लिए यहाँ 200 सीटों की क्षमता वाले दो अत्याधुनिक ऑडिटोरियम तैयार किए जा रहे हैं।

पर्यावरण अनुकूल 'ग्रीन बिल्डिंग' कॉन्सेप्ट

इस मॉल की बनावट में पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इसे पूरी तरह 'ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट' के आधार पर निर्मित किया जा रहा है:

  • इसके मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर छत (रूफटॉप) तक हर जगह हरियाली के लिए विशेष स्थान छोड़ा गया है।

  • प्राकृतिक रोशनी (धूप) और हवा के बेहतर बहाव के लिए भवन के मध्य हिस्से को खुला (वेंटिलेशन युक्त) रखा गया है।

  • मॉल की छत पर एक खूबसूरत डेकोरेटिव ज़ोन और ओपन-एयर फूड कोर्ट विकसित किया जाएगा।

  • पानी की बर्बादी को रोकने के लिए मॉल में 'वेस्ट वॉटर रिसाइक्लिंग प्लांट' भी लगाया जा रहा है।

निर्माण की समय-सीमा अब दिसंबर तक बढ़ी

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत दिसंबर 2025 में की गई थी, और शुरुआती योजना के तहत इसे अक्टूबर 2026 तक पूरा किया जाना था। हालांकि, निर्माण की वर्तमान गति को देखते हुए इसका करीब 30 प्रतिशत ढांचागत काम ही धरातल पर आ सका है।

परियोजना की संजीदगी को देखते हुए अब इसकी अंतिम समय-सीमा (डेडलाइन) को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दिया गया है। मुख्य सिविल ढांचा तैयार होने के बाद अंदरूनी साज-सज्जा (इंटीरियर), बिजली व्यवस्था, प्लंबिंग, लिफ्ट लगाने और फिनिशिंग जैसे तकनीकी कार्यों को इस बढ़ी हुई अवधि के भीतर पूरा किया जाएगा।