कवर्धा में धर्मांतरण को लेकर बवाल, इलाज का लालच देने का दावा
कबीरधाम: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले के तरेगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लालमाटी गांव से कथित धर्म परिवर्तन को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इलाके में आयोजित एक 'चंगाई सभा' के जरिए कुछ बाहरी तत्वों द्वारा सीधे-साधे बैगा आदिवासी परिवारों को तरह-तरह के प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए उकसाया जा रहा था। इस बात से नाराज ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर विरोध जताया और कथित रूप से इस गतिविधि में शामिल कुछ लोगों को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। पीड़ित परिवार की तहरीर पर तरेगांव थाना पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
चंगाई सभा के नाम पर आदिवासियों को गुमराह करने का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लालमाटी गांव में गुप्त रूप से चंगाई सभा का खेल चल रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि इस सभा में जुटी भीड़ के बीच आदिवासी समाज के लोगों को गंभीर बीमारियां ठीक करने, जीवन के सारे कष्ट मिटाने और बेहतर भविष्य का झांसा देकर मतांतरण के लिए प्रेरित किया जा रहा था। जब इसकी भनक सनातन धर्म से जुड़े स्थानीय लोगों और ग्रामीणों को लगी, तो वे भारी संख्या में मौके पर पहुंचे और इस कृत्य का कड़ा विरोध किया।
बीमारी ठीक करने का झांसा देकर जाल में फंसाया
इस मामले में एक बुजुर्ग बैगा आदिवासी महिला ने तरेगांव थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। महिला ने बताया कि उसका बेटा लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार चल रहा था। इसी मजबूरी का फायदा उठाने के लिए दो अज्ञात व्यक्ति उनके घर आए और दावा किया कि यदि वे ईसा मसीह की शरण में आ जाएं, तो उनका बेटा पूरी तरह ठीक हो जाएगा और घर की सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी। महिला का आरोप है कि उनके झांसे में आकर पूरा परिवार ईसाई समुदाय से जुड़ गया, लेकिन इसके बावजूद उसके बेटे की सेहत में रत्ती भर भी सुधार नहीं हुआ।
घर वापसी की बात पर दी जेल भेजने की धमकी
पीड़ित महिला ने पुलिस को दी शिकायत में यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि जब बेटे की तबीयत ठीक नहीं हुई और उसने अपने मूल सनातन धर्म और पारंपरिक रीति-रिवाजों में वापस लौटने की इच्छा जताई, तो आरोपियों ने अपना असली रंग दिखा दिया। पीड़ित परिवार पर दबाव बनाते हुए उन्हें डराया-धमकाया गया और बात न मानने पर झूठे केस में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी गई। इस प्रताड़ना से तंग आकर परिवार ने ग्रामीणों को आपबीती सुनाई, जिसके बाद ग्रामीणों ने सक्रिय होकर आरोपियों को दबोच लिया।
ग्रामीणों ने केंट और जिला प्रशासन से इस पूरे नेक्सस की निष्पक्षता से जांच करने और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने की मांग की है। वहीं तरेगांव थाना पुलिस का कहना है कि पीड़ित आदिवासी परिवार की शिकायत के आधार पर मर्ग कायम कर सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर जल्द ही आगे की कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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