ममता बनर्जी की पार्टी को बड़ा झटका? 21 सांसद BJP में जाने की संभावना
नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने इतिहास के सबसे बड़े और गहरे राजनीतिक संकट से गुजर रही है। राज्य विधानसभा में विधायकों की बड़ी बगावत के बाद अब यह संकट देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गया है, जहां टीएमसी के लोकसभा सांसदों में भारी टूट की खबरें सामने आ रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के कुल 29 लोकसभा सांसदों में से लगभग 21 सांसद बागी रुख अख्तियार कर दिल्ली में एक गुप्त स्थान पर डेरा डाले हुए हैं। यह चौंकाने वाला घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब खुद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी विपक्षी गठबंधन 'INDIA' की बैठक में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली में ही मौजूद हैं।
भाजपा में शामिल होने या अलग गुट बनाने की अटकलें
'संगबाद प्रतिदिन' की रिपोर्ट के अनुसार, टीएमसी के करीब 21 सांसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संपर्क में हैं और वे भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को अपना समर्थन दे सकते हैं। इस सिलसिले में सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक होने की भी खबर है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारी भी इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच दिल्ली पहुंच रहे हैं।
इस बगावती बैठक में शामिल होने वाले प्रमुख चेहरों में काकली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, असीत माल, प्रसून बंद्योपाध्याय, अरूप चक्रवर्ती, अबू ताहेर, सुखेंदु शेखर रॉय (पूर्व राज्यसभा सांसद), शर्मिला सरकार, खलीलुर रहमान और जगदीश वर्मा बसुनिया जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं।
रणनीति के लिए पांच सितारा होटलों में डेरा
पार्टी नेतृत्व को भनक न लगे, इसके लिए बागी सांसदों ने बेहद गोपनीय तरीके से अपनी रणनीति बनाई। कुछ सांसद दिल्ली के आलीशान पांच सितारा होटलों में छोटे-छोटे समूहों में ठहरे हुए हैं, जबकि कुछ अपने सरकारी आवासों से ही इस अभियान का संचालन कर रहे हैं। रविवार को दिनभर फोन कॉल्स और गुप्त मुलाकातों के जरिए आगे का खाका तैयार किया गया और सोमवार सुबह कुछ और सांसदों के दिल्ली पहुंचने के बाद यह खेमा बेहद मजबूत हो गया।
सांसदों के सामने दो मुख्य विकल्प
पार्टी से अलग होने के कानूनी और राजनीतिक नतीजों को देखते हुए बागी सांसदों के बीच दो मुख्य विकल्पों पर गंभीरता से चर्चा चल रही है:
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पहला विकल्प: लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला को एक आधिकारिक पत्र सौंपकर खुद को अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाली मूल संसदीय पार्टी से अलग कर एक 'स्वतंत्र समूह' या नए गुट के रूप में मान्यता देने की मांग करना।
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दूसरा विकल्प: यदि कानूनी रूप से गुट को मान्यता मिलने में पेंच फंसता है, तो सभी बागी सांसद एकजुट होकर लोकसभा की सदस्यता से सामूहिक इस्तीफा दे सकते हैं।
ऋतब्रत बनर्जी की बगावत और सुखेंदु शेखर का इस्तीफा
इससे पहले बंगाल विधानसभा में टीएमसी को तब पहला बड़ा झटका लगा था जब पार्टी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने पार्टी में दो-फाड़ कर दी। टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से करीब 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया, जिन्हें विधानसभा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता भी दे दी है।
विधायकों की इस खुली बगावत के तुरंत बाद सांसदों के इस्तीफे का दौर भी शुरू हो गया। टीएमसी के बेहद वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने सोमवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा सांसद पद, दोनों से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे में उन्होंने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जनता ने पिछले 15 वर्षों के कथित अराजक शासन, भारी भ्रष्टाचार, महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और रोजगार के मोर्चे पर विफलता के खिलाफ पहली बार भाजपा के पक्ष में ऐतिहासिक जनादेश दिया है। इस बड़ी टूट के बाद अब ममता बनर्जी के 28 साल पुराने राजनीतिक दल का वजूद दांव पर लग गया है।

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