गोयल ने पहले भी कहा है कि लक्ष्य 2026 के भीतर इसे लागू करना है
नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने यूरोपीय संसद के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के जल्द क्रियान्वयन पर चर्चा की। यह प्रतिनिधिमंडल एंजेलिका नीबलर के नेतृत्व में भारत आया था। बैठक में दोनों पक्षों ने एफटीए को द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक निर्णायक कदम बताया।
भारत-ईयू के रिश्तों पर गोयल ने क्या कहा?
मंत्री गोयल ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के रिश्ते तेजी से मजबूत हो रहे हैं और व्यापार, तकनीक, हरित ऊर्जा, कनेक्टिविटी, रक्षा, अंतरिक्ष, मोबिलिटी, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने इस समझौते को परिभाषित मील का पत्थर बताते हुए कहा कि इससे दोनों पक्षों के व्यवसायों, एमएसएमई और कुशल पेशेवरों के लिए नए अवसर खुलेंगे। भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापक एफटीए पर बातचीत इसी साल 27 जनवरी को पूरी हुई थी। यह समझौता वस्तुओं, सेवाओं और निवेश में व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ 2027 की शुरुआत तक लागू होने की उम्मीद है।
इस एफटीए से भारत को कैसे फायदा होगा?
उद्योग मंत्रालय के अनुसार, यह एफटीए भारत की अर्थव्यवस्था के नए क्षेत्रों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। खासतौर पर इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर फोकस है, जहां भारत 300 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य लेकर चल रहा है। यूरोप के लगभग दो ट्रिलियन डॉलर के बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने से भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और वे यूरोपीय सप्लाई चेन से और गहराई से जुड़ सकेंगी। इस समझौते में एमएसएमई और क्षेत्रीय औद्योगिक क्लस्टर्स को भी प्राथमिकता दी गई है, ताकि वे अपने कारोबार का विस्तार कर वैश्विक स्तर पर अनुबंध हासिल कर सकें।
क्या कहते हैं आंकड़े?
आंकड़ों के मुताबिक, यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों के बीच वस्तुओं का व्यापार 11.5 लाख करोड़ रुपये (136.54 अरब डॉलर) रहा, जिसमें भारत का निर्यात 6.4 लाख करोड़ रुपये (75.85 अरब डॉलर) और आयात 5.1 लाख करोड़ रुपये (60.68 अरब डॉलर) रहा। वहीं सेवाओं का व्यापार 7.2 लाख करोड़ रुपये (83.10 अरब डॉलर) तक पहुंच गया। भारत और यूरोपीय संघ मिलकर वैश्विक जीडीपी का करीब 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा रखते हैं। ऐसे में यह एफटीए दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग, नवाचार और सतत विकास को नई गति देने वाला माना जा रहा है।

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