‘समुदाय को निशाना नहीं बना रहे, सच बता रहे हैं’, फिल्म ‘केरला स्टोरी 2’ की कंट्रोवर्सी को लेकर बोले विपुल शाह
फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ ने जहां देशभर में चर्चा, सवाल और आलोचनाएं तीनों पैदा की थी। वहीं, दूसरे पार्ट को लेकर भी कुछ ऐसा ही माहौल बनाया जा रहा है। अमर उजाला से बातचीत में विपुल शाह ने बिना हिचक हर मुद्दे पर साफ बात की। पढ़िए इस बातचीत के प्रमुख अंश…
फिल्म का ट्रेलर देखकर लोगों का मानना है कि आप मुस्लिम समुदाय को टारगेट कर रहे हैं। क्या ऐसा वाकई है?
हमने पहली फिल्म की रिलीज पर भी कहा था और आज भी कहेंगे कि हमारा किसी भी समुदाय या धर्म से कोई विवाद नहीं है। हमारे मन में किसी के लिए कोई नकारात्मक भावना नहीं है। हम किसी को टारगेट नहीं कर रहे हैं। बस उन अपराधियों के खिलाफ बात कर रहे हैं जो ऐसा घिनौना काम कर रहे हैं। अगर कोई गलत काम कर रहा है तो फिर वो चाहे किसी भी धर्म या समाज से हो, उसे सामने लाना जरूरी है।
फिल्म की रिसर्च किस तरह से हुई?
हमने सात महीने पूरे देश में घूमकर रिसर्च की है। कई कोर्ट केस पढ़े और ढेर सारी पुलिस एफआईआर देखी। अगर कोई हमारी फिल्म के किसी सीन पर सवाल करे तो हम उसी समय उसे प्रमाण दिखा सकते हैं।
पिछली बार आपकी फिल्म कई जगह बैन की गई थी। क्या बार ऐसी रुकावटों के लिए तैयार हैं?
हर राजनीतिक पार्टी और सरकार की अपनी सोच और अपनी पसंद होती है। हम फिल्ममेकर हैं, किसी सरकार से लड़ने की स्थिति में नहीं आते। बस इतना कहेंगे कि हमारी फिल्म को बैन करके वो असल में उन पीड़ितों की आवाज दबा रहें हैं, जिनकी कहानियां हम सामने लाए हैं। हमारा काम सिर्फ सच को सामने लाना है।
कइयों का मानना है कि आपकी फिल्में प्रोपेगेंडा होती हैं। इस आरोप को कैसे देखते हैं?
आपने ‘अंगूर खट्टे हैं’ वाली कहावत तो सुनी ही होगी। बस वही वाली बात है। अब जिसकी ऐसी सोच है, उसे क्या समझाया जाए? वो जैसा मानना चाहता है, मानता रहे। लेकिन सच यह है कि ऐसा कहीं नहीं होता। किसी भी सरकार के पास इतना समय नहीं होता कि वो किसी एक फिल्म की मेकिंग में आकर शामिल हो जाए।
आलोचकों से क्या कहना चाहेंगे?
एक आर्टिस्ट को हमेशा अपनी बात खुलकर कहनी चाहिए। उसे लोगों की राय और आलोचना से डरना नहीं चाहिए? हमारे लिए सबसे जरूरी यह होता है कि हमारी फिल्म में एक भी सीन झूठा न हो। इसके बाद जिसे पसंद आए वो तारीफ करे। जिसे पसंद न आए वो आलोचना करे। हां, आलोचना भी तर्क के साथ करें।

CISF Constable Recruitment Dispute: Supreme Court Dismisses Central Government's Petition
नई शराब नीति: पारदर्शी लाइसेंसिंग से बढ़ी प्रतिस्पर्धा और राजस्व
लोकसभा सीटों में इजाफा बना बहस का मुद्दा, उत्तर को लाभ तो दक्षिण को नुकसान?
MP हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती, रिश्वत मामले में डॉक्टर को लगाई फटकार
दोस्त की हत्या के बाद भूत का डर बना वजह, आरोपी ने थाने में किया सरेंडर