मोहम्मद यूनुस ने किसी भी फैसले को लेकर जानकारी नहीं दी, मुझे अंधेरे में रखा
ढाका। बांग्लादेश में आम चुनाव के बाद नई सरकार गठित होते ही राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के जज्बात भी बदल गए हैं। इतने दिनों से मोहम्मद यूनुस की अगुआई में चल रही अंतरिम सरकार पर उन्होंने एक भी सवाल नहीं उठाया। अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होते रहे और भारत के साथ रिश्ते खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब शहाबुद्दीन कह रहे हैं कि मोहम्मद यूनुस ने उन्हें अंधेरे में रखा। बांग्लादेश की मीडिया के मुताबिक राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने कहा कि मोहम्मद यूनुस ने ना तो कभी संस्थानों के बीच समन्वय पर ध्यान दिया और ना ही वह किसी भी फैसले को लेकर उन्हें कोई जानकारी देते थे।
रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने कहा कि यहां तक कि विदेश दौरे की भी जानकारी उन्हें नहीं होती थी। विदेश नीति से संबंधित कोई भी सूचना राष्ट्रपति तक पहुंचती ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि उन्हें अलग-थलग करने के लिए सारी राजनीतिक हथकंडे अपनाए जा रहे थे। शहाबुद्दीन ने कहा कि सरकार को जरूरी फैसले राष्ट्रपति की सलाह से करने चाहिए लेकिन यूनुस खुद ही सारे फैसले कर लेते थे। संविधान कहता है कि विदेश दौरे पर जाते समय राष्ट्रपति को जानकारी देनी चाहिए और लौटने के बाद इसके परिणामों पर चर्चा होनी चाहिए। कार्यकाल के दौरान वह 14 से 15 बार विदेश गए लेकिन एक बार भी उनकी सहमति नहीं ली गई।
उन्होंने कहा कि मोहम्मद यूनुस को मुख्य सलाहकार बनाने में उनकी बड़ी भूमिका थी। इसके बाद भी वह मुझे नजरअंदाज ही करते थे। वह मुझसे मिलने कभी आए ही नहीं, ऊपर से मुझे अंधेरे में रखा। उन्होंने कहा कि कतर और कोसोवो से उन्हें आमंत्रण मिला था लेकिन उनके नाम से ही लेटर बनाकर यात्रा रद्द कर दी गई। उन्होंने कहा कि बड़ा ही अजीब है, क्या राष्ट्रपति भी संवैधानिक कार्यों में इतना बिजी हो सकता है। उन्होंने कहा कि मुझे जनता के सामने जाने ही नहीं दिया जाता था। मेरी छवि जनता के बीच से बिगाड़ने की कोशिश की गई। ये लोग चाहते थे कि मेरा नाम कहीं भी सामने ना आए और कोई मुझे पहचाने तक ना। उन्होंने कहा कि मुझे यूनिवर्सिटी के कॉन्वोकेशन तक में नहीं जाने दिया जाता था।

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