राघव चड्ढा ने संसद में उठाया ‘राइट टू रिकॉल’ का मुद्दा” जानिए किन देशों में लागू है यह व्यवस्था?
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (MP Raghav Chadha) ने बुधवार को संसद (Parliament) में ‘राइट टू रिकॉल’ पर चर्चा कर सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने कहा कि अगर चुने हुए नेता जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप काम नहीं करते हैं, तो वोटर्स को उन्हें कार्यकाल पूरा होने से पहले हटाने का अधिकार होना चाहिए।
शून्यकाल के दौरान अपने संबोधन में चड्ढा ने कहा, “जैसे मतदाताओं को वोट डालने का अधिकार है, वैसे ही काम न करने पर उन्हें अपने जनप्रतिनिधि को हटाने का हक भी होना चाहिए। ‘राइट टू रिकॉल’ लोकतंत्र को मजबूत बनाएगा और नेताओं को जवाबदेह बनायेगा।”
राइट टू रिकॉल क्या है?
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर बताया कि राइट टू रिकॉल एक ऐसी प्रक्रिया है जो मतदाताओं को किसी चुने हुए जनप्रतिनिधि का कार्यकाल खत्म होने से पहले उन्हें पद से हटाने का अधिकार देती है। सरल शब्दों में, अगर मतदाता अपने नेता के काम से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे उसे हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
राष्ट्रपति और जज को हटाया जा सकता है, नेताओं को क्यों नहीं?
चड्ढा ने तर्क दिया कि भारत में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और न्यायाधीशों के लिए पहले ही महाभियोग की व्यवस्था है और सरकारों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जा सकता है। ऐसे में चुने हुए नेताओं के लिए भी यही अधिकार होना चाहिए।
दुरुपयोग रोकने के उपाय
सांसद ने यह स्पष्ट किया कि राइट टू रिकॉल केवल लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने का साधन है, किसी नेता के खिलाफ हथियार नहीं। इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए उन्होंने कुछ शर्तें सुझाईं:
जनप्रतिनिधि को हटाने के लिए लगभग 35–40% मतदाताओं के हस्ताक्षर आवश्यक हों।
नेता को 18 महीने का ‘परफॉर्मेंस पीरियड’ दिया जाए, ताकि वह सुधार कर सके।
ऐसा होने पर पार्टियां भी योग्य और काम करने वाले नेताओं को ही टिकट देंगी।
किन देशों में लागू है यह व्यवस्था?
चड्ढा ने बताया कि अमेरिका, स्विट्जरलैंड और कनाडा सहित दुनिया के 20 से अधिक लोकतांत्रिक देशों में राइट टू रिकॉल लागू है। भारत में कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की ग्राम पंचायतों में भी यह प्रावधान मौजूद है। इसके अलावा, इस अधिकार से मतदाता अमेरिका, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, वेनेज़ुएला, पेरू, इक्वाडोर, जापान, ताइवान और कनाडा में अपनी सरकार को जवाबदेह बना सकते हैं।

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